Saturday, 20 August 2016

बड़े काम की चीज है छोटी सी लौंग, फ़ायदे जानकर हेरान रह जायेंगे आप... जानिए!

healthpatrika.com     09:39:00    
नई दिल्ली : लौंग की भारतीय खाने में एक खास जगह है। इसके उपयोग से खाने में स्वाद और महक के साथ-साथ कुछ अहम गुण भी जुड जाते हैं। इसका उपयोग तेल व एंटीसेप्टिक रुप में किया जाता है। लौंग में आपके स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के कई गुण होते हैं। 
benefites-of-cloves-gharelu-nuskhe-in-hindi

लौंग में होने वाला एक खास तरह का स्वाद इसमें होने वाले एक तत्व युजेनॉल की वजह से होता है, यही तत्व इसमें होने वाली एक खास तरह की गंध को पैदा करता है। हालांकि लौंग हर मौसम में हर उम्र के व्यक्तियों के लिए फायदेमंद होती है पर सर्दी के मौसम में इसकी खास उपयोगिता है क्योंकि इसकी तासीर बहुत गर्म होती है।

लौंग के तेल की तासीर काफी गर्म होती है और इस कारण इसे बहुत सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए। जब आप अपनी त्वचा पर इसे लगाएं तो किसी चीज़ के साथ मिलाकर ही लगाएं।

आइये जानते है  लौंग के क्या-क्या फायदे होतें है...

1. दांतों में होने वाले दर्द में लौंग के इस्तेमाल से राहत मिलती है और यही कारण है कि 99 प्रतिशत टूथपेस्ट में होने वाले पदार्थो की लिस्ट में लौंग खासतौर पर शामिल होती है।

2. खांसी और बदबूदार सांसों के इलाज के लिए लौंग बहुत फायदेमंद होती है। लौंग का नियमित इस्तेमाल इन समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। आप लौंग को अपने खाने में या फिर ऐसे ही सौंफ के साथ खा सकते हैं। इससे आपको खांसी से राहत मिलेगी।

3. सामान्य तौर पर होने वाली सर्दी को लौंग से दुरुस्त किया जा सकता है। आप लौंग के तेल की दस बूंदों को शहद के साथ मिलाकर दिन में दो से तीन बार इस्तेमाल करके अपनी सर्दी को ठीक कर सकते हैं। ऐसा करने से आपको सर्दी-जुकाम में राहत मिलेगी।

4. लौंग में दिमागी स्ट्रेस को कम करने का भी गुण होता है। लौंग को आप तुलसी, पुदीना और इलायची के साथ इस्तेमाल करके खुशबुदार चाय बना सकते हैं और चाहें तो यही मिक्स आप शहद के साथ इस्तेमाल करके भी स्ट्रेस से भी छुटकारा पा सकते हैं।

5. अगर आप त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे मुंहासों, ब्लैकहेड्स,और व्हाइट हेड्स से परेशान हैं तो आपके लिए लौंग का तेल फायदेमंद हो सकता है। आपको इसको अपने फेसपैक में मिलाकर इस्तेमाल करें क्योंकि यह काफी गर्म होता है और इसको सीधे त्वचा पर नहीं लगाया जा सकता है।

6. लौंग का तेल अन्य किसी भी तेल के मुकाबले सबसे ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है। एंटीऑक्सीडेंट स्वस्थ त्वचा और शरीर् को तंदुरुस्त रखने में बहुत कारगर होते हैं। लौंग के तेल में मिनरल्स जैसे पोटेशियम, सोडियम, फॉस्फोरस, आयरन, विटामिन-A, और विटामिन-C अत्यधिक मात्रा में होते हैं।

7. लौंग के तेल को किसी जहरीले कीड़े के काटने पर, कट लग जाने पर, घाव पर और फंगल इंफेशन पर भी इस्तेमाल किया जाता है।

8. लौंग के इस्तेमाल से बनी चाय से बालों को बहुत फायदा होता है। लौंग की चाय को बाल कलर करने और शैम्पू करने के बाद लगाना चाहिए। इसे ठंडा करने के बाद ही बालों पर इस्तेमाल करना चाहिए। आपके बालों को सुंदर बनाने में यह बहुत कारगर है।

9.लौंग के उपयोग से उलटी आने की समस्या, जी घबराना और मॉर्निंग सिकनेस में आराम मिलता है। लौंग के तेल को इमली, थोडी सी शक्कर के साथ पानी के साथ पीना चाहिए।

10. लौंग से बालों के लिए कंडीशनर भी बनाया जा सकता है। अगर आपके बाल जल्दी-जल्दी उलझ जाते हैं तो लौंग से बना कंडीशनर बहुत असरकारक है।

# ऐसे बनाएं लौंग का कंडीशनर :- 

दो चम्मच पिसी हुई लौंग और आधा कप ऑलिव ऑइल को मिक्स करके धीमी आंच पर गर्म करना करे। इस मिक्स को आंच से उतारकर ठंडा कीजिए। अब इसे छान लीजिए और पैक करके रख दीजिए। जब भी आप शैम्पू करने जाते हैं इस मिक्स का थोड़ा हिस्सा अपनी हथेलियों के बीच में लीजिए और अपनी सिर की त्वचा पर लगा लीजिए। इसे 20 मिनट तक लगे रहने दीजिए और फिर शैम्पू कर लीजिए। ऐसा करने से आपके बल उलझे नही और बल सुन्दर दिखेंगे।

Tuesday, 16 August 2016

बवासीर से बचने के लिए अपनाएं ये घरेलु उपचार...

healthpatrika.com     22:18:00    
भोजन कि अनियमितता अनेक रोगों कि जड़ है. हम आपको बवासीर के घरेलु नुस्खे बताते है जिससे बवासीर से आसानी से मिटाया जा सकता है. आज की इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में कई लोग बवासीर से पीड़ित हैं. बवासीर का मुख्य कारण अनियमित खानपान और कब्ज है. बवासीर में मलद्वार के आसपास की नसें सूज जाती हैं. यह दो तरह का होता है : 1. अंदरूनी बवासीर- इसमें सूजन को छुआ नहीं जा सकता है, लेकिन इसे महसूस किया जा सकता है. 2. बाहरी बवासीर- इसमें सूजन को बाहर से महसूस किया जा सकता है. इसकी पहचान बहुत हीं आसान है. अगर आपको भी मल त्यागते वक्त बहुत दर्द होता है, मलद्वार से खून आता है या खुजली होती है, तो आपको बवासीर है. 
तो आइए कुछ घरेलू कारगर उपाय जानते हैं, जिनसे आप बवासीर से मुक्ति पा सकते हैं.बवासीर का देशी ( घरेलू ) इलाज :-


रेशेदार चीजें नियमित खाना शुरू कीजिए, इन्हें अपने दैनिक भोजन का एक आवश्यक अंग बना लीजिए.
हर दिन 8-10 ग्लास पानी जरुर पिएँ.

खाना समय से खाएँ.

रात में 100 gram किशमिश पानी में फूलने के लिए छोड़ दें. और फिर सुबह में जिस पानी में किशमिश को फुलाया है, उसी पानी में किशमिश को मसलकर खाएँ. कुछ दिनों तक लगातार इसका उपयोग करना बवासीर में अत्यंत लाभ करता है.

50 gram बड़ी इलायची लीजिए और इसे भून लीजिए. जब यह ठंडी हो जाए, तो इसे अच्छी तरह से पीस लीजिए. और फिर हर दिन सुबह खाली पेट में इसे कुछ दिनों तक नियमित पिएँ. यह आपको बहुत फायदा पहुंचाएगा.

बवासीर के ऊपर अरंडी का तेल लगाने से राहत मिलती है.

एक चम्मच मधु में ¼ चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिलाकर खाने से फायदा पहुँचता है.

अगर आपको बवासीर है, तो आपको खट्टे, मिर्ची वाले, मसालेदार और चटपटे खाने से कुछ दिनों के लिए परहेज करना पड़ेगा. जबतक कि आपका बवासीर पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता है.

डेढ़ से दो लीटर मट्ठा लीजिए और इसमें 50 gram जीरा पाउडर और थोड़ा सा नमक मिला लीजिए. और जब-जब आपको प्यास लगे तो पानी की जगह इस मट्ठे को पिएँ. कुछ दिनों तक ऐसा करने से बवासीर का मस्सा कम हो जाता है.

आम की गुठली के अंदर के भाग, और जामुन की गुठली के अंदर के भाग को सूखा लें. फिर इन दोनों का चूर बना लें. और फिर इस चूर को एक चम्मच हल्के गर्म पानी या मट्ठे के साथ कुछ दिन तक नियमित पिएँ. यह आपको लाभ पहुंचाएगा.

राजमा, बीन्स, दालें और मटर को अपने दैनिक आहार का हिस्सा बनाएँ.

फलों के ताजा जूस और सब्जियों के सूप नियमित पिएँ.

हर दिन सुबह केले का सेवन करें.

शराब न पिएँ, और चाय था कॉफ़ी का भी कम सेवन करें.

निम्बू, सेव, संतरा, और दही इत्यादि का सेवन करें.

हर दिन व्यायाम करें.


रात में खजूर को फूला लें. और सुबह फूला हुआ खजूर खाएँ. यह पेट को ठीक रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

जानिए हमारे शरीर के लिए कितना फायदेमंद होता है उपवास!

healthpatrika.com     21:49:00    
एक बार भोजन कर लेने के बाद आपको कम से कम आठ घंटे बाद ही दूसरा भोजन करना चाहिए। इस नियम का पालन आप तब भी कर सकते हैं, जब आप घर से बाहर हों। ये तो बात हुई योग के नियम की, लेकिन फिर भी सामान्य स्थिति में भी किसी इंसान को दो भोजनों के बीच कम से कम 5 घंटे का अंतर तो रखना ही चाहिए। ऐसा क्यों कहा जा रहा है? इसलिए क्योंकि खाली पेट ही हमारा मल उत्सर्जन तंत्र अच्छे तरीके से काम कर पाता है।


आइये इसे एक प्रयोग से समझने की कोशिश करते हैं। मान लीजिए कि आप एक खास मात्रा में भोजन करते हैं। खाने की इस मात्रा को दो हिस्सों में बांट लें और दिन में दो बार इसे खाएं। दूसरी तरफ एक दूसरा आदमी है, जो खाने की इसी मात्रा को 10 हिस्सों में बांट लेता है और दिन में दस बार इसे खाता है। आप देखेंगे कि जो शख्स इसे दस बार खा रहा है, वह मोटा होता जाएगा। जरा सोचकर देखें, दस बार खाने वाले ने भी तो उतना ही खाया, जितनी दो बार खाने वाले ने। फिर ऐसा क्यों हुआ कि दस बार खाने वाले पर मोटापा चढ़ गया और दो बार खाने वाला ठीक ठाक रहा।

आइये जानते है उपवास के फायदे :-

ऐेसा क्यों हुआ? ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि दस बार खाने वाले का मल उत्सर्जन तंत्र ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है। ऐसे मामलों में तमाम कचरा जिसे शरीर से बाहर निकल जाना चाहिए था, वह बाहर निकल नहीं पाता, क्योंकि पेट किसी वक्त खाली ही नहीं रहता। वह तो लगातार भरा हुआ है। जब पेट में खाना है और पाचन तंत्र काम कर रहा है तो मल उर्त्सजन तंत्र प्रभावी तरीके से काम नहीं कर पाता। सफाई तभी अच्छी तरह से होती है, जब पेट खाली होता है।

आपने कभी गौर किया है कि जब आप बहुत बीमार पड़ते हैं, बेहद कमजोर हो जाते हैं और फिर जब आप बिस्तर से उठने की कोशिश करते हैं तो आप कैसे चलते हैं?

एक एक कदम फूंक-फूंककर रखते हैं। जब आपका शरीर हल्‍का हो जाता है तो आपके भीतर तमाम दूसरी चीजों के प्रति सजगता अपने आप ही बढ़ती जाती है। मान लें आप बहुत ज्यादा भूखे हैं और खाना आपके सामने रख दिया जाए, तो क्या होता है? आप दोनों हाथों से टूट पड़ते हैं उस खाने पर। दरअसल, जब आप बहुत ज्यादा भूखे होते हैं तो आपका पूरा शरीर बस एक ही चीज चाहता है, उस खाने को जल्दी से जल्दी खा लेना चाहता है, लेकिन तब आप एक पल के लिए रुकें। खाना शुरू करने से पहले हर उस शख्स और चीज के प्रति आभार व्यक्त करें, जिसकी बदौलत यह खाना आप तक पहुंचा है। 

आपको बता दे कि मसलन वह खेत, वह किसान, वह व्यक्ति जिसने खाना बनाया और वह भी जिसने इसे आपको परोसा। इसके अलावा, उस खाने को भी धन्यवाद देना चाहिए, क्योंकि यह आपको जीवन दे रहा है। देखने में भले ही यह छोटी सी बात लग रही है लेकिन यह आप पर आपके शरीर की पकड़ को ढीला कर देती है। इससे यह अहसास होता है कि आप महज एक शरीर नहीं हैं। जब आप बहुत भूखे होते हैं तो आप महज एक शरीर होते हैं। अपने अंदर थोड़ा सा जगह बनाएं अब आपको लगेगा कि आप अब उतने भूखे नहीं हैं। भूख जहां की तहां है, आप भी वहीं हैं, पर फिर भी लगेगा मानो सब ठीक ठाक है। इसी बात को अगर आपने समझने में देर कर दी तो यकीन मानिए आपका उपवास कष्टकारी हो जाएगा।

उपवास का महत्व :-

यहां एक बात और बहुत महत्वपूर्ण है कि किसी भी हाल में जबर्दस्ती न किया जाए। अगर आप शरीर के प्राकृतिक चक्र पर गौर करेंगे तो आपको पता चलेगा कि मंडल नाम की एक चीज होती है। मंडल का मतलब है कि हर 40 से 48 दिनों में शरीर एक खास चक्र से गुजरता है।

हर चक्र में तीन दिन ऐसे होते हैं जिनमें आपके शरीर को भोजन की आवश्यकता नहीं होती। अगर आप अपने शरीर को लेकर सजग हो जाएंगे तो आपको खुद भी इस बात का अहसास हो जाएगा कि इन दिनों में शरीर को भोजन की जरूरत नहीं होती। इनमें से किसी भी एक दिन आप बिना भोजन के आराम से रह सकते हैं।

11 से 14 दिनों में एक दिन ऐसा भी आता है, जब आपका कुछ भी खाने का मन नहीं करेगा। उस दिन आपको नहीं खाना चाहिए। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि कुत्ते और बिल्लियों के अंदर भी इतनी सजगता होती है। कभी गौर से देखें, किसी खास दिन वे कुछ भी नहीं खाते। दरअसल, अपने सिस्टम के प्रति वे पूरी तरह सजग होते हैं। जिस दिन सिस्टम कहता है कि आज खाना नहीं चाहिए, वह दिन उनके लिए शरीर की सफाई का दिन बन जाता है और उस दिन वे कुछ भी नहीं खाते। 

अब आपके भीतर तो इतनी जागरूकता नहीं कि आप उन खास दिनों को पहचान सकें। फिर क्या किया जाए! बस इस समस्या के समाधान के लिए अपने यहां एकादशी का दिन तय कर दिया गया। हिंदी महीनों के हिसाब से देखें तो हर 14 दिनों में एक बार एकादशी आती है। इसका यह है कि हर 14 दिनों में आप एक दिन बिना खाए रह सकते हैं। 

अगर आप बिना कुछ खाए रह ही नहीं सकते या आपका कामकाज ऐसा है, जिसके चलते भूखा रहना तुम्हारे वश में नहीं और भूखे रहने के लिए जिस साधना की जरूरत होती है, वह भी आपके पास नहीं है, तो आप फलाहार ले सकते हैं। कुल मिलाकर बात इतनी है कि बस अपने सिस्टम के प्रति जागरूक हो जाएं और यह देखने की कोशिश करें कि कुछ दिन ऐसे हैं, जिनमें आपको खाने की आवश्यकता महसूस नहीं होती। इन दिनों जबर्दस्ती खाना अच्छी बात नहीं है।

उपवास करने के नियम :-

कैसे करें उपवास? मान लो कोई एक निश्‍चित समय के लिए उपवास करना चाहता है। इस उपवास के साथ उसे साधना या इसी तरह की कोई और आध्यात्मिक क्रिया करनी चाहिए। बिना अपने शरीर और दिमाग को तैयार किए अगर आप जबर्दस्ती उपवास करने की कोशिश करेंगे तो इससे आपके सेहत को नुकसान होगा। लेकिन आपका शरीर और दिमाग अगर पूरी तरह तैयार है और ऊर्जा के मामले में भी आपको कोई समस्या नहीं है तो बेशक उपवास रखना आपके लिए बहुत लाभकारी होगा। 

एक बात और, अगर आप बार-बार चाय और कॉफी पीने के आदी हैं और उपवास रखने की कोशिश करते हैं तो आपको बहुत ज्यादा दिक्कत होगी। इस समस्या का तो एक ही हल है। अगर आप उपवास रखना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने खानपान की आदतों को सुधारें। पहले सही तरह का खाना खाने की आदत डालें, तब उपवास की सोचो। अगर खाने की अपनी इच्छा को आप जबर्दस्ती रोकने की कोशिश करेंगे तो यह आपके शरीर को हानि पहुंचायेगा।

हो सकता है, आपमें से कुछ लोग ऐसे भी हों, जो इस मामले में भी अपना कमाल दिखाना चाहते हों। हो सकता है, ऐसे लोग तीन दिन का उपवास रख लें और फिर दुनिया को बताते फिरें कि देखो, हमने कितना वीरता का काम किया है। ऐसा भूलकर भी मत करें। याद रखें, इससे आपको हानि ही होगी, लाभ नहीं हो सकता। होगा यह कि आप खुद को कमजोर बना लेंगे। ऐसा कुछ भी करने से बेहतर यह है कि आप अपने अंदर इस बात की गहरी समझ पैदा करें कि शरीर कैसे काम करता है और आपके लिए सबसे अच्छा क्या है।

ऐसा नहीं है कि उपवास करना हर किसी के लिए फायदेमंद है, लेकिन हां, पूरी समझ के साथ इसे किया जाए तो इसके अनगिनत फायदे हो सकते हैं। तो बस अपने शरीर की उस खास स्थिति को पहचानें और उस दौरान खाना छोड़ दें। यही उपवास करने का सबसे अच्छा तरीका है।

Wednesday, 10 August 2016

गर्मियों में किडनी की पथरी से बचने के लिए अपनाएं ये 5 आसान उपाय... जानिए!

healthpatrika.com     21:04:00    
इन दिनों गर्मी से केवल आपके शरीर की ऊपरी त्वचा ही बल्कि किडनी पर भी प्रभाव पड़ता है। मुंबई स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल में डिपार्टमेंट ऑफ यूरोलॉजी के हेड डॉक्टर प्रदीप राव के मुताबिक, गर्मी में तापमान बढ़ने के साथ किडनी की समस्या भी तेज़ी से बढ़ती है।
these-5-tips-to-avoid-kidney-stones-health-tips-in-hindi

इस समस्या बचने के लिए ध्यान रखे ये 5 बातें :-

खाने-पीने का रखें ध्यान :- ज्यादा नमक और चीनी के सेवन से बचें। ज्यादा नमक से हड्डियों से कैल्शियम हटकर किडनी में जमा हो सकता है। चीनी से ग्लूकोज लेवल बढ़ सकता है, जिससे किडनी प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा ऑक्ज़ालेट (oxalate) से भरपूर चीजें कम खाएं। कैल्सियम के लिए दूध, दही और पनीर आदि खाएं।

खूब पानी पियें :- रोजाना लगभग 10 गिलास पानी पिएं। इससे शरीर से अवशिष्ट नमक और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है और स्टोन बनने का खतरा नहीं रहता है। आप जिंजर अले, ताजा फलों का रस, नींबू पानी या छाछ भी पी सकते हैं। लेकिन कॉफ़ी जैसी कैफीन युक्त चीजें पीने से बचें।

डॉक्टर की सलाह ले :- अगर आपको कभी किडनी स्टोन की समस्या रही हो, तो अपना ख़ास ध्यान रखें। कभी-कभी दवाएं किडनी स्टोन की संभावना को कम कर सकती हैं। आप डॉक्टर की सलाह से हाइड्रोक्लोरोथियाजिड जैसी दवा ले सकते हैं, ये यूरिन में जारी होने वाले कैल्सियम की मात्रा को कम करती है। यूरिन में सिस्टीन लेवल को भी कम करती है।

दवाओं की जांच ज़रूर करें :- प्रोटीन, एंटिबायोटिक और डाइयुरेटिक दवा लेने से किडनी स्टोन का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, ऐन्टासिड और कैल्सियम की गोलियों का ज्यादा उपयोग भी हानिकारक हो सकता है। इसलिए इन दवाओं को लेने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।


यूरिन को रोके नहीं :- लंबे समय तक ब्लैडर में यूरिन को रोके रखना किडनी के लिए खतरनाक होता है और आपको किडनी स्टोन का खतरा हो सकता है। लंबे समय तक ब्लैडर में यूरिन के रहने से वेस्ट मिनरल्स और साल्ट को स्टोन में बदलने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।

अगर आप अधिक मीठा खाते हैं तो हो जाएं सावधान, हो सकती हैं ये 7 बीमारियां!

healthpatrika.com     09:10:00    
क्या आप जानते हैं इस मीठे से आप कई बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। तो आइये जानते है अधिक मीठा खाने से क्या नुकसान होते है...
reasons-why-you-should-quit-sugar-health-tips-in-hindi

1.वजन बढ़ना :- बहुत से मीठे खाद्य पदार्थों को खाने से मोटापा बढ़ने लगता है। मीठे के कारण मोटापे की समस्या हो जाती है और फैट शरीर में स्टोर होने लगता है जिसके कारण कमर के आसपास के हिस्से में मोटापा बढ़ने लगता है। और पेट लटकने लग जाता है।

2.डायबिटीज का खतरा :- मीठा खाने से सीधे तौर पर तो शुगर नहीं होती लेकिन लगातार मीठा बहुत अधिक खाने से इंसुलिन लेवल बढ़ जाता है जिससे डायबिटीज का खतरा भी बढ़ने लगता है। डायबिटीज और मोटापा होने से हार्ट प्रॉब्लम्स भी होने लगती हैं और मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने का खतरा बढ़ जाता है।

3.कॉलेस्ट्रॉल स्तर का बढ़ना :- अधिक अधिक मीठा खाने से कॉलेस्ट्रॉल लेवल भी बढ़ने लगता है। जिससे हार्ट फंक्शन पर दबाव पड़ता है।

4.दिल की बीमारियों का खतरा :- अधिक शुगर के सेवन से ब्लड वैसल्स पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है।

5.प्रतिरक्षा तंत्र होता है कमजोर :- अधिक मीठा खाने से शरीर में इंफेक्शंस और बैक्टीरिया से लड़ने की ताकत कम हो जाती है।

6.लीवर के लिए ख़तरनाक :- अधिक शुगर के सेवन से लीवर पर अधिक दबाव पड़ता है। साथ ही ये फैट के रूप में लीवर में स्टोर होती रहती है। इससे व्यक्ति को नॉन एल्कालिक फैटी लीवर डिजीज भी हो जाती हैं।

7.एंजाइटी और डिप्रेशन :- आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन शुगर में मूड बदलने की क्षमता होती है। शुगर की वजह से थकान होना, एंजाइटी और डिप्रेशन होना आम बात है। दरअसल, शुगर से डोपामाइन स्तर बहुत बढ़ जाता है। जिससे एंजाइटी डिस्ऑर्डर होना, डिप्रेशन और बहुत गुस्सा आना जैसी शिकायतें होनी लगती है।

© 2011-2014 Health Patrika. Designed by Bloggertheme9. Powered by Blogger.