Monday, 8 August 2016

शरीर को फिट रखने में बहुत मददगार होता है केला... जानिए कैसे?

healthpatrika.com     08:37:00    
नियमित केला खाना हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। केला कई गुणों की खान हैं। इससे हमें सिर्फ ऊर्जा ही नहीं मिलती, यह शरीर को फिट रखने में हमें मदद करता है। कई बीमारियों से उबरने में केला काफी मददगार है। रोजाना इसका सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है। एक केला निरंतर ऊर्जा को बढ़ाता है। केले में तीन प्राकृतिक शुगर पाए जाते हैं- सूक्रोज, फ्रक्टोज और ग्लूकोज।
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केले में थाइमिन, रिबोफ्लेविन, नियासिन और फॉलिक एसिड के रूप में विटामिन-Aऔर विटामिन-B पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है। इसके अलावा केला ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। दरअसल, केले में विटामिन-C, विटामिन-A, पौटेशियम और विटामिन B-6 होता है।

केला ऊर्जा का बहुत अच्छा स्रोत माना गया है, इसमें औसतन 105 कैलोरी पायी जाती हैं जो शरीर को किसी भी प्रकार की कमजोरी से बचाती है। अगर आप कसरत करने के बाद थक जाते हैं, तो तुरन्त एक केला खा लीजिए यह खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ा कर आपको शक्ति और उर्जा प्रदान करता है।

केले में पोटेशियम की मात्रा अधिक होती है और सोडियम की मात्रा बहुत कम होती है जिसकी वजह से यह आपके ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है। यह आपके शरीर में पानी की कभी कमी नहीं होने देता है और आपके शरीर को दिल के दौरे और स्ट्रोक से बचाता है।


केले में ऐसे बहुत से तत्व पाये जाते हैं जो अम्लता यानि एसिडिटी से बचाते हैं। यह आपके पेट में अंदरूनी परत चढ़ा कर अलसर जैसी बीमारियों से बचाता है। आपको बता दे कि केले में फाइबर पाया जाता है, जिससे पाचन क्रिया मजबूत बनती है। गैस्ट्रिक की बीमारी वाले लोंगो के लिये केला बहुत प्रभावशाली उपचार है।

Sunday, 7 August 2016

शहद और लहसुन साथ खाने से होते है चमत्कारिक फायदे, देखे VIDEO!

healthpatrika.com     17:20:00    
शहद और लहसुन दोनों सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते है। लेकिन इन दोनों को मिलाकर एक साथ खाने के कई फायदे होते है। और इस वीडियो में आप देख सकते है कि दोनों को एक साथ खाना कितना फायदेमंद होता है। 
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लहसुन और शहद के मेल से इस घोल की शक्ति बढ जाती है और फिर यह इम्यून सिस्टम को मजबूत कर देता है। इम्यून सिस्टम मजबूत होने से शरीर मौसम की मार से बचा रहता है और उसे कोई बीमारी नहीं होती।


देखिये विडियो :-

Saturday, 6 August 2016

कहीं आपके टूथपेस्ट में तो नही है जहर, स्टडी में हुआ है चौंकाने वाला खुलासा... अभी जानिए!

healthpatrika.com     18:19:00    
टोक्सिक लिंक संस्था की एक स्टडी में सामने आया कि कुछ टूथपेस्ट और हैंडवॉश में ट्राइक्लोसन केमिकल मिला है। दिल्ली से लिए गए सैंपलों में करीब 72 फीसदी में यह खतरनाक केमिकल मिला।
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स्टडी में दिल्ली में टूथपेस्ट और साबुन के 11-11 सैंपल लिए गए। जांच में यह चोकाने वाला सच सामने आया कि एक साबुन और 4 टूथपेस्ट के सैंपल में ट्राइक्लोसन 3000 पीपीएम की तय मात्रा से अधिक पाया गया।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस केमिकल से कैंसर, लिवर और डिप्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे बच्चों की सेहत पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। कुछ टूथपेस्ट में पॉलीथीन ग्लाइकोल्स (पॉलीथीन) नाम का पदार्थ पाया जाता है, यह केमिकल आपके शरीर के लिए जहर की तरह है जो आपके दिमाग, किडनी और हृदय को नुकसान पहुंचा सकता है। 

टूथपेस्ट में ट्रिक्लोसन नाम का जर्म किलर केमिकल पाया जाता है, जिसे पहले पेस्टसाइड की तरह इस्तेमाल किया जाता था। अध्ययन से पता चला है कि यह केमिकल थायराइड, हृदय की समस्या और कैंसर जैसे रोगों को जन्म दे सकता है।

एक सर्वे के अनुसार टूथपेस्ट में इस्तेमाल होने वाले एक केमिकल से कैंसर जैसी बीमारी होने की संभावना होती है। जो टूथपेस्ट हम इस्तेमाल करते हैं। उसमें झाग एसएलएस (सोडियम लॉरियल सल्फेट) केमिकल से बनते हैं। जो कैंसर का कारण बन सकता है।

टूथपेस्ट में सोर्बिटोल मीठा पदार्थ पाया जाता हैं, जिससे पचाना थोड़ा मुश्किल होता है। इसी कारण पाचन संबंधी कई परेशानियां जैसे दस्त, गैस और अपच का सामना करना पड़ सकता है।


टूथपेस्ट में पाए जाने वाले फ्लोराइड का बच्चों के दिमाग पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे मस्तिष्क के विकास में रुकावट आने से ऑटिज्म या डिस्लेक्सिया जैसी समस्या हो सकती है।

Friday, 5 August 2016

विराट कोहली ऐसे रखते है खुद को फिट... देखिये Video!

healthpatrika.com     17:24:00    
नई दिल्ली : कहते हैं हार्ड वर्क का कोई शॉर्टकट नहीं होता। भारतीय क्रिकेट टीम के टेस्ट कप्तान विराट कोहली एक ऐसे खिलाड़ी बनकर उभरे हैं, जो मैदान में हर रोज नया कीर्तिमान बनाने की होड़ में जुटे हैं। लेकिन इसके पीछे वह कितनी लगन से मेहनत करते हैं, इसका आप अंदाजा भी नही लगा सकते हैं।
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एक टीम को लीड करना आसान काम नहीं! इसके लिए वह मैदान में प्रैक्टिस तो करते ही हैं, लेकिन इसके अलावा जिम में वह कितना मुश्किल वर्कआउट करते हैं, इसका उन्होंने एक वीडियो शेयर कर खुलासा किया है।
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इंस्टाग्राम पर शेयर किए एक वीडियो में वह हर्कुलियन एक्सरसाइज करते दिख रहे हैं। आखिरकार वेटलिफ्टिंग भी इंटेंस फिटनेस के लिए जरूरी है। ये वीडियो उनके फैन्स को जरूर मोटिवेशन देगा।


देखिये विडियो :-

अमरूद से ज्यादा फायदेमंद होते है उसके छिलके, यह जानने के बाद आप कभी नहीं फेकेंगे अमरूद के छिलके!!

healthpatrika.com     08:36:00    
फल खाने से पहले उन्हें छीलना एक आम बात होती है। ख़ासतौर पर तब जब उसके छिलके पर उसे खराब होने से बचाने और आकर्षक दिखाने के लिए केमिकल और वैक्स लगाए गए हों। अमरूद भी एक ऐसा ही फल है। अमरूद आसानी से उपलब्ध होने वाला फल है और ये काफी सस्ता भी होता है इसलिए इसे अधिक मात्रा में खाया जाता है।
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लेकिन कई बार इसको आकर्षक दिखाने के लिए विक्रेता इसमें वैक्स लगाकर बेचते हैं। ऐसे में तो इनको छीलना ज़रूरी हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि अमरूद का छिलका भी उतना ही हेल्दी होता जितना अंदरूनी हिस्सा? अमरूद के छिलके में ऐसे तत्व होते हैं जो ब्लड ग्लूकोज़ लेवल कम करते हैं और टाइप 2 डायबिटीज़ को कंट्रोल करते हैं।

इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन में ये बात सामने आई  है कि कच्चे अमरूद के छिलके में एंटी-डायबिटीक तत्व होते हैं। ये अध्ययन बताता है कि कच्चे अमरूद को छिलके समेत खाने से सीरम ट्राईग्लाईसेराइड लेवल कम होने में मदद मिलती है। इसके अलावा, डायबिटीज़ से जुड़ी कॉमन लिपिड एबनॉर्मिलिटी जैसे कि हाइपर- ट्राईग्लाईसेराइडेमिया (hypertriglyceridaemia) और हाइपर-कॉलेस्ट्रॉलेमिया (hypercholesterolemia) कम होती है।

हाइपर- ट्राईग्लाईसेराइडेमिया के कारण आमतौर पर इंसुलिन रेज़िस्टेंस, हाइपरइंसुलेनेमिया और ग्लूकोज़ टोलेरेंस जैसी समस्याएं हो जाती हैं। इसलिए कच्चे अमरूद का छिलका टाइप-2 डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए बहुत अच्छा हो सकता है।

अमरूद के छिलके कॉलेस्ट्रॉल लेवल, एलडीएल (low-density lipoprotein), एचएलडी (cholesterol and increase high-density lipoprotein) भी कम करते हैं जिससे कि डायबिटीज़ के मरीज़ों का दिल की बीमारियों का जोखिम घटता है।


अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि इन छिलको में हेपेटो-प्रोटेक्टिव तत्व होते हैं। इनसे अल्कालाइन फोस्फेटेस (Alkaline Phosphatase) कम होता है जिससे कि लीवर की क्षमता बढ़ती है। इसलिए अमरूद को छिलकों के साथ खाएं। उसके ऊपर के केमिकल और वेक्स से बचने के लिए उसे अच्छी तरह से धोना न भूलें।

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