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Saturday, 22 October 2016

पपीता खाने से होते है ये चोंका देने वाले फ़ायदे जिनसे आप अभी तक अनजान है!

healthpatrika.com     21:21:00    
पपीता खाना यूं तो हर किसी के लिए फायदेमंद हैं। ये तो आप जानते ही हैं डेंगू फीवर में पपीते के पत्ते के रस को पिलाया जाता है जिससे प्लेटलेट्स बढ़ती हैं। लेकिन इसके कुछ खास फायदे भी हैं। पपीता और उसकी पत्तियों को खाने से आप किन बीमारियों से बच सकते हैं। जिनसे शायद आप अभी तक अनजान है।
health-benefits-and-uses-of-papaya-food-health-tips-in-hindi

तो आइये जानते है पपीता खाने से और क्या-क्या फायदे होते है...

1. जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं हो अगर वे रोजाना एक कटोरी पपीता खाएंगे तो उनका हाजमा ठीक रहेगा।

2. कच्चा पपीता खाने के भी कई फायदे हैं। ये प्रोटीन डायजेशन माना जाता है यानी जिन लोगों को चना, राजमा या दालें हजम नहीं होती उन्हें थोड़ा सा कच्चा पपीता सलाद के तौर पर खाना चा‍हिए। इससे उनमें प्रोटीन की कमी नहीं होगी। लेकिन आपको बता दे कि कच्चा पपीता छोटे बच्चों को नहीं देना चाहिए क्योंकि बच्चों का पाचन तंत्र कच्चे पपीते को डायजेस्ट नहीं कर पाएगा। इसलिए इसे छोटे बच्चो से दूर रखे।

3. पपीते में पाए जाने वाला बीटा कैरोटिन विटामिन-A में तब्दील होता है जो कि स्वस्थ आंखों के लिए बहुत फायदेमंद हैं। इससे आपकी आखें कमज़ोर नही होती है।

4. यदि किसी ने फ्राइड या हैवी खा लिया है तो उसे पपीता खाना चाहिए। पपीते को खाना खाने के बाद भी खाया जा सकता है।

5. अगर इम्यूनिटी बढ़ाना चाहते हैं तो भी पपीता खा सकते हैं। ऐसे लोग यदि रोजाना पपीता खाएंगे उनको कफ, कोल्ड और बुखार जल्दी-जल्दी होना कम हो जाता है।

6. डायबिटीज मरीज भी पपीता खा सकते हैं। यह उनके लिए भी फायदेमंद होता है।


आपको बता दे कि सावधनी रखने वाली बात यह है कि गर्भवती महिलाओं को बहुत ज्यादा पपीता नहीं खाना चाहिए।

Wednesday, 12 October 2016

दूध और केला साथ में लेने से होते है ये हेरान कर देने वाले फायदे... जानिए!

healthpatrika.com     22:24:00    
दूध और केला दोनों ऐसी खाने पीने की चीज़ें हैं जिनके फायदे के बारे में हम सभी जानते हैं। लेकिन, जब हम ख़ास दूध-केला डाइट लेते हैं तो इसके फायदे कुछ और बढ़ जाते हैं। तो आज हम आपको बतायेंगे दूध-केला डाइट लेने से क्या क्या फायदे होते है.
health-benefits-of-banana-and-milk-diet-health-tips-in-hindi

1. दूध-केला डाइट :-

बनाना-मिल्क डाइट यानी दूध और केला। दूध और केले की डाइट से आप अपना वजन कम कर सकते हैं। दूध-केला डाइट आपका वजन संतुलन करके आपको फिट बनाये रखता है।

2. दूध-केला डाइट कैसे काम करती है :-

आपको बता दे कि डॉक्टर जॉर्ज हारोप ने 1934 में सबसे पहली बार दूध-केला डाइट प्रोग्राम तैयार किया। इस डाइट प्लान के पीछे ये सोच थी कि शरीर को कम कैलोरी लेने के बाद भी कैसे स्वस्थ रखा जा सकता है। इस डाइट प्रोग्राम में खाने में हर बार दो तीन केला और एक कप फैट फ्री मिल्क लिया जाता है। केला दूध से पहले या बाद में खाया जा सकता है। या आप स्मूदी बनाकर भी पी सकते हैं। बस आपको साथ साथ बहुत सारा पानी पीना चाहिए। इससे आप एक दिन में एक हजार से कम कैलोरी लेंगे।

3. केला-दूध डाइट की विशेषता :-

हर केले में 100 कैलोरी होते हैं। वहीं, एक कप दूध में 80 से अधिक कैलोरी होती है। इसलिए अगर आप इस डाइट प्लान के हिसाब से चलेंगे यानि एक दिन में तीन बार ये डाइट लेंगे तो आप 900 के आसपास कैलोरी लेंगे। जो कि वजन कम करने में बहुत अच्छा होता है।

4. केला-दूध डाइट के फायदे :-

केला-दूध डाइट से वजन किस तरह से कम हो सकता है वो तो हम बता ही चुके है और आप जान भी चुके हैं। लेकिन इसके अलावा भी इसके कई फायदे हैं। इससे त्वचा को बहुत फायदा होता है और मुहांसों के निशान मिटने लगते हैं। दांत सफेद करने के लिए भी ये एक कारगार तरीका है। ये आपकी खूबसूरती बढ़ाता है।

5. केले से होने वाले फायदे :-

केला सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है लेकिन फिर भी कई लोग इसके सेवन से बचते है, लेकिन केले के ये फायदे जानने के बाद वो लोग भी केले का सेवन करने लगेंगे। बता दे कि केला में विटामिन ए, बी, सी और ई, मिनिरल्स, पोटैशियम, जिंक, आयरन आदि कई पोषक तत्व हैं जो आपको सेहत से जुड़े ये बड़े फायदे देंगे।

6. फैट फ्री मिल्क से होने वाले फायदे :-

फैट फ्री मिल्क यानी मलाईरहित दूध में वसा की मात्रा कम होती है, यानी यह कोलेस्‍ट्रॉल कम करने के लिए अच्‍छा आहार है। मलाईरहित दूध में फैट नहीं होता है, लेकिन बाकि सभी जरूरी पौष्टिक तत्‍व होते हैं। मलाईरहित दूध में मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाता है। अगर आप व्‍यायाम के बाद स्किम्ड मिल्‍क का सेवन करते हैं, तो इससे मांसपेशियां मजबूत होंगी। इसके अलावा, इसके सेवन से कोशिकाओं में होने वाली टूट-फूट की मरम्मत के लिए शरीर को आवश्यक ऊर्जा भी मिलती है।

7. केला और दूध साथ लेने से होने वाले फायदे :-

जब केले और दूध का सेवन साथ किया जाता है तो शरीर को भरपूर मात्रा में प्रोटीन, विटामिन, फाइबर और मिनरल मिल जाते हैं वो भी बिना फैट के। इस डाइट से जो पोषण मिलता है वो शरीर को तीन चार दिन के लिए ऊर्जा देने के लिए काफी है।

8. इन बातों का रखें ध्यान :-


जब आप केला-दूध डाइट लेंगे तो हो सकता है अचानक कैलोरी कम होने की वजह से आपको कमजोरी महसूस हो। हालांकि ये कमजोरी इतनी भी नहीं होती कि संभाली न जा सके। अगर फिर भी आपको लगे कि कमजोरी है तो आप एक टाइम सामान्य खाना ले सकते हैं और दो टाइम केला दूध। तब भी आपकी कैलोरी कम हो जाएंगी। इसके अलावा, महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान ये डाइट नहीं लेनी चाहिए क्योंकि उनकी आयरन की जरूरत इससे पूरी नहीं होती।

Thursday, 29 September 2016

दिल को सेहतमंद रखने के लिए अपनाएं ये 10 उपाय...जानिए!

healthpatrika.com     15:45:00    
नई दिल्ली : कहते है सेहतमंद रहने के लिए दिल और दिमाग दोनों का स्वस्थ रहना ज़रूरी होता है। आजकल दिल की बीमारियाँ बहुत अधिक बढ़ रही है लेकिन दिल को स्वस्थ रखना कोई बहुत बड़ा मशक्कत वाला काम नहीं है। इसके लिए आपको हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना पड़ेगा। जिससे आप दिल की बिमारियों से आसानी से छुटकारा पा सकते है। तो आज हम आपको बताने जा रहे है दिल को हेल्दी रखने के कुछ टिप्स।
healthpatrika-10-tips-to-keep-your-heart-healthy-health-tips-in-hindi

दिल को सेहतमंद और हेल्दी रखने के 10 उपाय (10-tips-to-keep-your-heart-healthy-in-hindi) :-

1. खाने में नमक की मात्रा कम करें :- अगर आप अपने ब्लड-प्रेशर को कंट्रोल में रखना चाहते हैं तो खाने में नमक कम डालें और खाने के वक्त ऊपर से नमक कम लें। यह आपके दिल के लिए अच्छा रहेगा।

2. तनावमुक्त रहें :- आपको बता दे कि स्ट्रेस हार्ट (Heart) के लिए साइलेंट किलर का काम करता है। यह कोलेस्ट्रॉल और ब्लड-शुगर लेवल दोनों को अनियंत्रित करता है।

3. धूम्रपान न करे :- धूम्रपान करने से रक्त कोशिकाएं संकरी हो जाती है जिसके कारण रक्त अच्छी तरह से आवागमन नहीं कर पाता है। फलस्वरूप ब्लड-प्रेशर और हर्ट रेट दोनों बढ़ जाता है।

4. रोज अपने दांतों को फ्लॉस और ब्रश करें :- आपको बता दे कि जिन लोगों को मसूड़ों के संक्रमण की बीमारी होती है या सिंपल चबाने से भी ओरल कैविटी से एक प्रकार के बैक्टीरिया निकलता है जो रक्त में मिलकर रक्त के प्रवाह में बाधा उत्पन्न करता है और रक्त का थक्का बन जाता है। इससे हार्ट एटैक की संभावना बढ़ जाती है।

5. ब्रेकफास्ट करना न भूलें :- सही समय पर नाश्ता नहीं करने से शरीर तनाव में आ जाता है जिसके कारण ब्लड प्रेशर के बढ़ने की संभावना रहती है जो दिल के लिए अच्छा नहीं होता है।

6. टमाटर खाएं :- टमाटर में लाइकोपेन नाम का एन्टीऑक्सिडेंट होता है जो कोलेस्ट्रॉल को होने से रोकता है।

7. नियमित चेकअप करवाएं :- आजकल के लाइफ-स्टाइल के लिए मोटापा, हाइपरटेनशन, कोलेस्ट्रॉल, डाइबीटिज का खतरा रहता है जो हर्ट के लिए बहुत ही अनहेल्दी होता है। इसलिए हमेशा नियमित रूप से चेकअप करवाते रहना बहुत ज़रूरी होता है जिससे समय से पहले खतरे को रोका जा सके।

8. आठ घंटे की नींद लें :- अपर्याप्त मात्रा में सोने से शरीर से सी-रियाएक्टिव प्रोटीन की कमी हो जाती है जो दिल को अस्वस्थ रखने और स्ट्रेस को बढ़ाने में अहम् भूमिका निभाता है। इसलिए पर्याप्त मात्रा (8 घंटे) की नींद ले।

9. प्याज खाएं :- प्याज़ में क्वेरसटीन नाम का एन्टीऑक्सिडेंट होता है जो फ्री रैडिकल्स से होने वाले क्षति से शरीर को बचाकर दिल को हेल्दी रखता है।


10. पानी पियें :- आपको पर्याप्त मात्रा में पानी पियें। पानी दिल के लिए अच्छा होता है।

Tags : Heart Tips in Hindi, Health Tips in Hindi

Wednesday, 21 September 2016

चिकनगुनिया के प्रकोप को कम करने के लिए अपनाएं ये 4 घरेलू उपाय ( Gharelu Nuskhe For Chikungunya in Hindi)

healthpatrika.com     13:14:00    
Title : चिकनगुनिया के प्रकोप को कम करने के लिए अपनाएं ये 4 घरेलू उपाय ( Gharelu Nuskhe For Chikungunya in Hindi)

अक्सर डॉक्टर्स हेल्दी और फिट रहने की सलाह देते हैं और उसके लिए व्यायाम, एक्सरसाइज-योगा आदि करने के साथ ही हेल्दी डाइट लेने की भी सलाह देते हैं, लेकिन जब आप बीमार हों तो आपको अपनी सेहत का खासतौर पर खयाल रखने की जरूरत होती है। हम आपको बतायेंगे की चिकनगुनिया जेसी बीमारियों से केसे बचा जा सकता है?
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आपको बता दे कि चिकनगुनिया(Chikungunya) का इलाज अभी तक खोजा नहीं जा सका है। लेकिन, फिर भी डॉक्‍टरों का कहना है कि इस बीमारी से उबरने में आहार की विशेष भूमिका होती है। यदि आपका आहार सही हो और इसके साथ ही आप कुछ घरेलू उपाय अपनाएं तों आप चिकनगुनिया के प्रकोप को काफी हद तक कम कर सकते हैं। इसलिए चिकनगुनिया(Chikungunya) से बचने के लिए खान-पान का ध्यान रखना जरूरी है।

चिकनगुनिया(Chikungunya) का सबसे अच्‍छा इलाज तो यही है कि इसे होने ही न दिया जाए। लेकिन, फिर भी आप अगर चिकनगुनिया के शिकार हो जाते हैं, तो बेहतर है कि आप स्‍वयं को इसके प्रभाव से बचा सकते हैं। तो हम आपको बतायेंगे चिकनगुनिया के बचने के कुछ घरेलु नुस्खे (Gharelu Nuskhe)

जहां तक घरेलू उपायों या घरेलु नुस्खो की बात है, तो कई लोगों की नजर में ये अधिक सुरक्षित और कारगर होते हैं। साथ ही इन उपायों को किफायती भी माना जाता है। ये घरेलू उपाय प्रकृति के साथ सामंजस्‍य बैठा कर काम करते हैं।

इसलिए ये बीमारी से पूरी तरह राहत दिलाने दिलाते हैं। और साथ ही मानव शरीर को उस बीमारी से लड़ने के लिए तैयार भी करते हैं ये घरेलू नुस्‍खे। ये हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं और साथ ही उसे बीमारी के दुष्‍प्रभाव से उबरने में सहायता भी प्रदान करते हैं।

तो चिकनगुनिया होने पर आप इन घरेलू उपायों या घरेलु नुस्खो को अपनाकर चिकनगुनिया से बच सकते हैं :-

1. अधिक से अधिक पानी पिएं :- अधिक पानी पीना हमे कई बीमारियों से बचाता है। पानी आपके शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। चिकनगुनिया(Chikungunya) होने पर आपके शरीर में पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में अगर आप पर्याप्‍त मात्रा में पानी नहीं पिएंगे तो आपको डिहाइड्रेशन यानी निर्जलीकरण की समस्‍या हो सकती है, जो आपके लिए अच्‍छा नहीं होगा। इसलिए चिकनगुनिया होने पर आप अधिक से अधिक पानी पियें।

2. आराम :- चिकनगुनिया(Chikungunya) के कारण आपका शरीर में काफी थकावट आ जाती है। इससे शरीर में काफी कमजोरी आ जाती है। इस कमजोरी को दूर करने के लिए शरीर को पर्याप्‍त मात्रा में आराम देना जरूरी होता है। आराम करने से आपकी मांसपेशियों को राहत मिलती है और उन्‍हें बीमारियों के दुष्‍प्रभाव से उबरने का पर्याप्‍त समय मिल जाता है।

3. चोकलेट खाएं :- चिकनगुनिया(Chikungunya) होने पर इसका असर व्‍यक्ति के रक्‍तचाप पर भी पड़ता है। व्‍यक्ति का रक्‍तचाप कम होने से व्‍यक्ति का स्‍वभाव भी बिगड़ जाता है। इसके साथ ही उसे काफी पसीना आता है और वह काफी थका हुआ महसूस करता है। ऐसे में चॉकलेट खाने से उसे राहत मिलती है। चॉकलेट में मौजूद तत्‍व और ग्‍लूकोज शरीर में घुलकर व्‍यक्ति को आराम और ऊर्जा प्रदान करते हैं।

4. दूध और डेयरी उत्पादों का सेवन करे :- दूध से बने उत्पाद, दूध-दही या अन्य। चीजों का सेवन भी खूब करना चाहिए। इससे चिकनगुनिया होने पर काफी राहत मिलती है।

5. नीम के पत्ते :- नीम के पत्तों को पीस कर उसका रस निकालकर चिकनगुनिया(Chikungunya) से ग्रसित व्यक्ति को दें। यह चिकनगुनिया से लड़ने में काफी मदद करता है।


Tags : Chikungunya in Hindi, Gharelu Nuskhe in Hindi

Sunday, 28 August 2016

तो इसलिए दूध का रंग सफेद और बिस्किट में होते है छेद... आप भी जानिए!

healthpatrika.com     17:39:00    
ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने इस बात पर शोध किया है कि आखिर दूध सफेद क्‍यों होता है और बिस्किट के बीच कई छेद क्‍यों होते हैं। इस शोध के बाद वैज्ञानिकों कहते हैं कि दुनियाभर में दूध के मुकाबले शायद ही कोई ऐसा पेय पदार्थ हो जो ताकत देने के साथ ही सबसे अधिक बिकता है।
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छोटी उम्र से लेकर बड़े-बुजुर्गों में दूध पीने से ताकत और ताजगी का अहसास होता है। वैज्ञानिकों ने रिसर्च 'दूध के रंग' को लेकर की है और दावा किया है कि दूध में 87 फीसद पानी और 13 फीसद फैट, प्रोटीन, विटामिन, मिनरल आदि से मिलकर बना होता है। यही वजह है कि रिसर्च में फैट, प्रोटीन, विटामिन आदि की वजह से ही दूध का रंग सफेद बताया गया है।


वहीं इसके साथ-साथ, बाजार में उपलब्‍ध होने वाले ज्‍यादातर बिस्किट में कई छेद मौजूद होते हैं। रिसर्च में बताया गया है बिस्किट को अच्छी तरह से पकाने के लिए इसके बिच में छेद रखे जाते है। इन छेदों की वजह से बिस्किट आसानी से पक जाता है और उसके कच्‍चे रहने की तमाम संभावनाएं कम हो जाती हैं।

Saturday, 20 August 2016

बड़े काम की चीज है छोटी सी लौंग, फ़ायदे जानकर हेरान रह जायेंगे आप... जानिए!

healthpatrika.com     09:39:00    
नई दिल्ली : लौंग की भारतीय खाने में एक खास जगह है। इसके उपयोग से खाने में स्वाद और महक के साथ-साथ कुछ अहम गुण भी जुड जाते हैं। इसका उपयोग तेल व एंटीसेप्टिक रुप में किया जाता है। लौंग में आपके स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के कई गुण होते हैं। 
benefites-of-cloves-gharelu-nuskhe-in-hindi

लौंग में होने वाला एक खास तरह का स्वाद इसमें होने वाले एक तत्व युजेनॉल की वजह से होता है, यही तत्व इसमें होने वाली एक खास तरह की गंध को पैदा करता है। हालांकि लौंग हर मौसम में हर उम्र के व्यक्तियों के लिए फायदेमंद होती है पर सर्दी के मौसम में इसकी खास उपयोगिता है क्योंकि इसकी तासीर बहुत गर्म होती है।

लौंग के तेल की तासीर काफी गर्म होती है और इस कारण इसे बहुत सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए। जब आप अपनी त्वचा पर इसे लगाएं तो किसी चीज़ के साथ मिलाकर ही लगाएं।

आइये जानते है  लौंग के क्या-क्या फायदे होतें है...

1. दांतों में होने वाले दर्द में लौंग के इस्तेमाल से राहत मिलती है और यही कारण है कि 99 प्रतिशत टूथपेस्ट में होने वाले पदार्थो की लिस्ट में लौंग खासतौर पर शामिल होती है।

2. खांसी और बदबूदार सांसों के इलाज के लिए लौंग बहुत फायदेमंद होती है। लौंग का नियमित इस्तेमाल इन समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। आप लौंग को अपने खाने में या फिर ऐसे ही सौंफ के साथ खा सकते हैं। इससे आपको खांसी से राहत मिलेगी।

3. सामान्य तौर पर होने वाली सर्दी को लौंग से दुरुस्त किया जा सकता है। आप लौंग के तेल की दस बूंदों को शहद के साथ मिलाकर दिन में दो से तीन बार इस्तेमाल करके अपनी सर्दी को ठीक कर सकते हैं। ऐसा करने से आपको सर्दी-जुकाम में राहत मिलेगी।

4. लौंग में दिमागी स्ट्रेस को कम करने का भी गुण होता है। लौंग को आप तुलसी, पुदीना और इलायची के साथ इस्तेमाल करके खुशबुदार चाय बना सकते हैं और चाहें तो यही मिक्स आप शहद के साथ इस्तेमाल करके भी स्ट्रेस से भी छुटकारा पा सकते हैं।

5. अगर आप त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे मुंहासों, ब्लैकहेड्स,और व्हाइट हेड्स से परेशान हैं तो आपके लिए लौंग का तेल फायदेमंद हो सकता है। आपको इसको अपने फेसपैक में मिलाकर इस्तेमाल करें क्योंकि यह काफी गर्म होता है और इसको सीधे त्वचा पर नहीं लगाया जा सकता है।

6. लौंग का तेल अन्य किसी भी तेल के मुकाबले सबसे ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है। एंटीऑक्सीडेंट स्वस्थ त्वचा और शरीर् को तंदुरुस्त रखने में बहुत कारगर होते हैं। लौंग के तेल में मिनरल्स जैसे पोटेशियम, सोडियम, फॉस्फोरस, आयरन, विटामिन-A, और विटामिन-C अत्यधिक मात्रा में होते हैं।

7. लौंग के तेल को किसी जहरीले कीड़े के काटने पर, कट लग जाने पर, घाव पर और फंगल इंफेशन पर भी इस्तेमाल किया जाता है।

8. लौंग के इस्तेमाल से बनी चाय से बालों को बहुत फायदा होता है। लौंग की चाय को बाल कलर करने और शैम्पू करने के बाद लगाना चाहिए। इसे ठंडा करने के बाद ही बालों पर इस्तेमाल करना चाहिए। आपके बालों को सुंदर बनाने में यह बहुत कारगर है।

9.लौंग के उपयोग से उलटी आने की समस्या, जी घबराना और मॉर्निंग सिकनेस में आराम मिलता है। लौंग के तेल को इमली, थोडी सी शक्कर के साथ पानी के साथ पीना चाहिए।

10. लौंग से बालों के लिए कंडीशनर भी बनाया जा सकता है। अगर आपके बाल जल्दी-जल्दी उलझ जाते हैं तो लौंग से बना कंडीशनर बहुत असरकारक है।

# ऐसे बनाएं लौंग का कंडीशनर :- 

दो चम्मच पिसी हुई लौंग और आधा कप ऑलिव ऑइल को मिक्स करके धीमी आंच पर गर्म करना करे। इस मिक्स को आंच से उतारकर ठंडा कीजिए। अब इसे छान लीजिए और पैक करके रख दीजिए। जब भी आप शैम्पू करने जाते हैं इस मिक्स का थोड़ा हिस्सा अपनी हथेलियों के बीच में लीजिए और अपनी सिर की त्वचा पर लगा लीजिए। इसे 20 मिनट तक लगे रहने दीजिए और फिर शैम्पू कर लीजिए। ऐसा करने से आपके बल उलझे नही और बल सुन्दर दिखेंगे।

Tuesday, 16 August 2016

जानिए हमारे शरीर के लिए कितना फायदेमंद होता है उपवास!

healthpatrika.com     21:49:00    
एक बार भोजन कर लेने के बाद आपको कम से कम आठ घंटे बाद ही दूसरा भोजन करना चाहिए। इस नियम का पालन आप तब भी कर सकते हैं, जब आप घर से बाहर हों। ये तो बात हुई योग के नियम की, लेकिन फिर भी सामान्य स्थिति में भी किसी इंसान को दो भोजनों के बीच कम से कम 5 घंटे का अंतर तो रखना ही चाहिए। ऐसा क्यों कहा जा रहा है? इसलिए क्योंकि खाली पेट ही हमारा मल उत्सर्जन तंत्र अच्छे तरीके से काम कर पाता है।


आइये इसे एक प्रयोग से समझने की कोशिश करते हैं। मान लीजिए कि आप एक खास मात्रा में भोजन करते हैं। खाने की इस मात्रा को दो हिस्सों में बांट लें और दिन में दो बार इसे खाएं। दूसरी तरफ एक दूसरा आदमी है, जो खाने की इसी मात्रा को 10 हिस्सों में बांट लेता है और दिन में दस बार इसे खाता है। आप देखेंगे कि जो शख्स इसे दस बार खा रहा है, वह मोटा होता जाएगा। जरा सोचकर देखें, दस बार खाने वाले ने भी तो उतना ही खाया, जितनी दो बार खाने वाले ने। फिर ऐसा क्यों हुआ कि दस बार खाने वाले पर मोटापा चढ़ गया और दो बार खाने वाला ठीक ठाक रहा।

आइये जानते है उपवास के फायदे :-

ऐेसा क्यों हुआ? ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि दस बार खाने वाले का मल उत्सर्जन तंत्र ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है। ऐसे मामलों में तमाम कचरा जिसे शरीर से बाहर निकल जाना चाहिए था, वह बाहर निकल नहीं पाता, क्योंकि पेट किसी वक्त खाली ही नहीं रहता। वह तो लगातार भरा हुआ है। जब पेट में खाना है और पाचन तंत्र काम कर रहा है तो मल उर्त्सजन तंत्र प्रभावी तरीके से काम नहीं कर पाता। सफाई तभी अच्छी तरह से होती है, जब पेट खाली होता है।

आपने कभी गौर किया है कि जब आप बहुत बीमार पड़ते हैं, बेहद कमजोर हो जाते हैं और फिर जब आप बिस्तर से उठने की कोशिश करते हैं तो आप कैसे चलते हैं?

एक एक कदम फूंक-फूंककर रखते हैं। जब आपका शरीर हल्‍का हो जाता है तो आपके भीतर तमाम दूसरी चीजों के प्रति सजगता अपने आप ही बढ़ती जाती है। मान लें आप बहुत ज्यादा भूखे हैं और खाना आपके सामने रख दिया जाए, तो क्या होता है? आप दोनों हाथों से टूट पड़ते हैं उस खाने पर। दरअसल, जब आप बहुत ज्यादा भूखे होते हैं तो आपका पूरा शरीर बस एक ही चीज चाहता है, उस खाने को जल्दी से जल्दी खा लेना चाहता है, लेकिन तब आप एक पल के लिए रुकें। खाना शुरू करने से पहले हर उस शख्स और चीज के प्रति आभार व्यक्त करें, जिसकी बदौलत यह खाना आप तक पहुंचा है। 

आपको बता दे कि मसलन वह खेत, वह किसान, वह व्यक्ति जिसने खाना बनाया और वह भी जिसने इसे आपको परोसा। इसके अलावा, उस खाने को भी धन्यवाद देना चाहिए, क्योंकि यह आपको जीवन दे रहा है। देखने में भले ही यह छोटी सी बात लग रही है लेकिन यह आप पर आपके शरीर की पकड़ को ढीला कर देती है। इससे यह अहसास होता है कि आप महज एक शरीर नहीं हैं। जब आप बहुत भूखे होते हैं तो आप महज एक शरीर होते हैं। अपने अंदर थोड़ा सा जगह बनाएं अब आपको लगेगा कि आप अब उतने भूखे नहीं हैं। भूख जहां की तहां है, आप भी वहीं हैं, पर फिर भी लगेगा मानो सब ठीक ठाक है। इसी बात को अगर आपने समझने में देर कर दी तो यकीन मानिए आपका उपवास कष्टकारी हो जाएगा।

उपवास का महत्व :-

यहां एक बात और बहुत महत्वपूर्ण है कि किसी भी हाल में जबर्दस्ती न किया जाए। अगर आप शरीर के प्राकृतिक चक्र पर गौर करेंगे तो आपको पता चलेगा कि मंडल नाम की एक चीज होती है। मंडल का मतलब है कि हर 40 से 48 दिनों में शरीर एक खास चक्र से गुजरता है।

हर चक्र में तीन दिन ऐसे होते हैं जिनमें आपके शरीर को भोजन की आवश्यकता नहीं होती। अगर आप अपने शरीर को लेकर सजग हो जाएंगे तो आपको खुद भी इस बात का अहसास हो जाएगा कि इन दिनों में शरीर को भोजन की जरूरत नहीं होती। इनमें से किसी भी एक दिन आप बिना भोजन के आराम से रह सकते हैं।

11 से 14 दिनों में एक दिन ऐसा भी आता है, जब आपका कुछ भी खाने का मन नहीं करेगा। उस दिन आपको नहीं खाना चाहिए। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि कुत्ते और बिल्लियों के अंदर भी इतनी सजगता होती है। कभी गौर से देखें, किसी खास दिन वे कुछ भी नहीं खाते। दरअसल, अपने सिस्टम के प्रति वे पूरी तरह सजग होते हैं। जिस दिन सिस्टम कहता है कि आज खाना नहीं चाहिए, वह दिन उनके लिए शरीर की सफाई का दिन बन जाता है और उस दिन वे कुछ भी नहीं खाते। 

अब आपके भीतर तो इतनी जागरूकता नहीं कि आप उन खास दिनों को पहचान सकें। फिर क्या किया जाए! बस इस समस्या के समाधान के लिए अपने यहां एकादशी का दिन तय कर दिया गया। हिंदी महीनों के हिसाब से देखें तो हर 14 दिनों में एक बार एकादशी आती है। इसका यह है कि हर 14 दिनों में आप एक दिन बिना खाए रह सकते हैं। 

अगर आप बिना कुछ खाए रह ही नहीं सकते या आपका कामकाज ऐसा है, जिसके चलते भूखा रहना तुम्हारे वश में नहीं और भूखे रहने के लिए जिस साधना की जरूरत होती है, वह भी आपके पास नहीं है, तो आप फलाहार ले सकते हैं। कुल मिलाकर बात इतनी है कि बस अपने सिस्टम के प्रति जागरूक हो जाएं और यह देखने की कोशिश करें कि कुछ दिन ऐसे हैं, जिनमें आपको खाने की आवश्यकता महसूस नहीं होती। इन दिनों जबर्दस्ती खाना अच्छी बात नहीं है।

उपवास करने के नियम :-

कैसे करें उपवास? मान लो कोई एक निश्‍चित समय के लिए उपवास करना चाहता है। इस उपवास के साथ उसे साधना या इसी तरह की कोई और आध्यात्मिक क्रिया करनी चाहिए। बिना अपने शरीर और दिमाग को तैयार किए अगर आप जबर्दस्ती उपवास करने की कोशिश करेंगे तो इससे आपके सेहत को नुकसान होगा। लेकिन आपका शरीर और दिमाग अगर पूरी तरह तैयार है और ऊर्जा के मामले में भी आपको कोई समस्या नहीं है तो बेशक उपवास रखना आपके लिए बहुत लाभकारी होगा। 

एक बात और, अगर आप बार-बार चाय और कॉफी पीने के आदी हैं और उपवास रखने की कोशिश करते हैं तो आपको बहुत ज्यादा दिक्कत होगी। इस समस्या का तो एक ही हल है। अगर आप उपवास रखना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने खानपान की आदतों को सुधारें। पहले सही तरह का खाना खाने की आदत डालें, तब उपवास की सोचो। अगर खाने की अपनी इच्छा को आप जबर्दस्ती रोकने की कोशिश करेंगे तो यह आपके शरीर को हानि पहुंचायेगा।

हो सकता है, आपमें से कुछ लोग ऐसे भी हों, जो इस मामले में भी अपना कमाल दिखाना चाहते हों। हो सकता है, ऐसे लोग तीन दिन का उपवास रख लें और फिर दुनिया को बताते फिरें कि देखो, हमने कितना वीरता का काम किया है। ऐसा भूलकर भी मत करें। याद रखें, इससे आपको हानि ही होगी, लाभ नहीं हो सकता। होगा यह कि आप खुद को कमजोर बना लेंगे। ऐसा कुछ भी करने से बेहतर यह है कि आप अपने अंदर इस बात की गहरी समझ पैदा करें कि शरीर कैसे काम करता है और आपके लिए सबसे अच्छा क्या है।

ऐसा नहीं है कि उपवास करना हर किसी के लिए फायदेमंद है, लेकिन हां, पूरी समझ के साथ इसे किया जाए तो इसके अनगिनत फायदे हो सकते हैं। तो बस अपने शरीर की उस खास स्थिति को पहचानें और उस दौरान खाना छोड़ दें। यही उपवास करने का सबसे अच्छा तरीका है।

Wednesday, 10 August 2016

गर्मियों में किडनी की पथरी से बचने के लिए अपनाएं ये 5 आसान उपाय... जानिए!

healthpatrika.com     21:04:00    
इन दिनों गर्मी से केवल आपके शरीर की ऊपरी त्वचा ही बल्कि किडनी पर भी प्रभाव पड़ता है। मुंबई स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल में डिपार्टमेंट ऑफ यूरोलॉजी के हेड डॉक्टर प्रदीप राव के मुताबिक, गर्मी में तापमान बढ़ने के साथ किडनी की समस्या भी तेज़ी से बढ़ती है।
these-5-tips-to-avoid-kidney-stones-health-tips-in-hindi

इस समस्या बचने के लिए ध्यान रखे ये 5 बातें :-

खाने-पीने का रखें ध्यान :- ज्यादा नमक और चीनी के सेवन से बचें। ज्यादा नमक से हड्डियों से कैल्शियम हटकर किडनी में जमा हो सकता है। चीनी से ग्लूकोज लेवल बढ़ सकता है, जिससे किडनी प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा ऑक्ज़ालेट (oxalate) से भरपूर चीजें कम खाएं। कैल्सियम के लिए दूध, दही और पनीर आदि खाएं।

खूब पानी पियें :- रोजाना लगभग 10 गिलास पानी पिएं। इससे शरीर से अवशिष्ट नमक और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है और स्टोन बनने का खतरा नहीं रहता है। आप जिंजर अले, ताजा फलों का रस, नींबू पानी या छाछ भी पी सकते हैं। लेकिन कॉफ़ी जैसी कैफीन युक्त चीजें पीने से बचें।

डॉक्टर की सलाह ले :- अगर आपको कभी किडनी स्टोन की समस्या रही हो, तो अपना ख़ास ध्यान रखें। कभी-कभी दवाएं किडनी स्टोन की संभावना को कम कर सकती हैं। आप डॉक्टर की सलाह से हाइड्रोक्लोरोथियाजिड जैसी दवा ले सकते हैं, ये यूरिन में जारी होने वाले कैल्सियम की मात्रा को कम करती है। यूरिन में सिस्टीन लेवल को भी कम करती है।

दवाओं की जांच ज़रूर करें :- प्रोटीन, एंटिबायोटिक और डाइयुरेटिक दवा लेने से किडनी स्टोन का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, ऐन्टासिड और कैल्सियम की गोलियों का ज्यादा उपयोग भी हानिकारक हो सकता है। इसलिए इन दवाओं को लेने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।


यूरिन को रोके नहीं :- लंबे समय तक ब्लैडर में यूरिन को रोके रखना किडनी के लिए खतरनाक होता है और आपको किडनी स्टोन का खतरा हो सकता है। लंबे समय तक ब्लैडर में यूरिन के रहने से वेस्ट मिनरल्स और साल्ट को स्टोन में बदलने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।

अगर आप अधिक मीठा खाते हैं तो हो जाएं सावधान, हो सकती हैं ये 7 बीमारियां!

healthpatrika.com     09:10:00    
क्या आप जानते हैं इस मीठे से आप कई बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। तो आइये जानते है अधिक मीठा खाने से क्या नुकसान होते है...
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1.वजन बढ़ना :- बहुत से मीठे खाद्य पदार्थों को खाने से मोटापा बढ़ने लगता है। मीठे के कारण मोटापे की समस्या हो जाती है और फैट शरीर में स्टोर होने लगता है जिसके कारण कमर के आसपास के हिस्से में मोटापा बढ़ने लगता है। और पेट लटकने लग जाता है।

2.डायबिटीज का खतरा :- मीठा खाने से सीधे तौर पर तो शुगर नहीं होती लेकिन लगातार मीठा बहुत अधिक खाने से इंसुलिन लेवल बढ़ जाता है जिससे डायबिटीज का खतरा भी बढ़ने लगता है। डायबिटीज और मोटापा होने से हार्ट प्रॉब्लम्स भी होने लगती हैं और मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने का खतरा बढ़ जाता है।

3.कॉलेस्ट्रॉल स्तर का बढ़ना :- अधिक अधिक मीठा खाने से कॉलेस्ट्रॉल लेवल भी बढ़ने लगता है। जिससे हार्ट फंक्शन पर दबाव पड़ता है।

4.दिल की बीमारियों का खतरा :- अधिक शुगर के सेवन से ब्लड वैसल्स पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है।

5.प्रतिरक्षा तंत्र होता है कमजोर :- अधिक मीठा खाने से शरीर में इंफेक्शंस और बैक्टीरिया से लड़ने की ताकत कम हो जाती है।

6.लीवर के लिए ख़तरनाक :- अधिक शुगर के सेवन से लीवर पर अधिक दबाव पड़ता है। साथ ही ये फैट के रूप में लीवर में स्टोर होती रहती है। इससे व्यक्ति को नॉन एल्कालिक फैटी लीवर डिजीज भी हो जाती हैं।

7.एंजाइटी और डिप्रेशन :- आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन शुगर में मूड बदलने की क्षमता होती है। शुगर की वजह से थकान होना, एंजाइटी और डिप्रेशन होना आम बात है। दरअसल, शुगर से डोपामाइन स्तर बहुत बढ़ जाता है। जिससे एंजाइटी डिस्ऑर्डर होना, डिप्रेशन और बहुत गुस्सा आना जैसी शिकायतें होनी लगती है।

Monday, 8 August 2016

शरीर को फिट रखने में बहुत मददगार होता है केला... जानिए कैसे?

healthpatrika.com     08:37:00    
नियमित केला खाना हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। केला कई गुणों की खान हैं। इससे हमें सिर्फ ऊर्जा ही नहीं मिलती, यह शरीर को फिट रखने में हमें मदद करता है। कई बीमारियों से उबरने में केला काफी मददगार है। रोजाना इसका सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है। एक केला निरंतर ऊर्जा को बढ़ाता है। केले में तीन प्राकृतिक शुगर पाए जाते हैं- सूक्रोज, फ्रक्टोज और ग्लूकोज।
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केले में थाइमिन, रिबोफ्लेविन, नियासिन और फॉलिक एसिड के रूप में विटामिन-Aऔर विटामिन-B पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है। इसके अलावा केला ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। दरअसल, केले में विटामिन-C, विटामिन-A, पौटेशियम और विटामिन B-6 होता है।

केला ऊर्जा का बहुत अच्छा स्रोत माना गया है, इसमें औसतन 105 कैलोरी पायी जाती हैं जो शरीर को किसी भी प्रकार की कमजोरी से बचाती है। अगर आप कसरत करने के बाद थक जाते हैं, तो तुरन्त एक केला खा लीजिए यह खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ा कर आपको शक्ति और उर्जा प्रदान करता है।

केले में पोटेशियम की मात्रा अधिक होती है और सोडियम की मात्रा बहुत कम होती है जिसकी वजह से यह आपके ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है। यह आपके शरीर में पानी की कभी कमी नहीं होने देता है और आपके शरीर को दिल के दौरे और स्ट्रोक से बचाता है।


केले में ऐसे बहुत से तत्व पाये जाते हैं जो अम्लता यानि एसिडिटी से बचाते हैं। यह आपके पेट में अंदरूनी परत चढ़ा कर अलसर जैसी बीमारियों से बचाता है। आपको बता दे कि केले में फाइबर पाया जाता है, जिससे पाचन क्रिया मजबूत बनती है। गैस्ट्रिक की बीमारी वाले लोंगो के लिये केला बहुत प्रभावशाली उपचार है।

Friday, 5 August 2016

अमरूद से ज्यादा फायदेमंद होते है उसके छिलके, यह जानने के बाद आप कभी नहीं फेकेंगे अमरूद के छिलके!!

healthpatrika.com     08:36:00    
फल खाने से पहले उन्हें छीलना एक आम बात होती है। ख़ासतौर पर तब जब उसके छिलके पर उसे खराब होने से बचाने और आकर्षक दिखाने के लिए केमिकल और वैक्स लगाए गए हों। अमरूद भी एक ऐसा ही फल है। अमरूद आसानी से उपलब्ध होने वाला फल है और ये काफी सस्ता भी होता है इसलिए इसे अधिक मात्रा में खाया जाता है।
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लेकिन कई बार इसको आकर्षक दिखाने के लिए विक्रेता इसमें वैक्स लगाकर बेचते हैं। ऐसे में तो इनको छीलना ज़रूरी हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि अमरूद का छिलका भी उतना ही हेल्दी होता जितना अंदरूनी हिस्सा? अमरूद के छिलके में ऐसे तत्व होते हैं जो ब्लड ग्लूकोज़ लेवल कम करते हैं और टाइप 2 डायबिटीज़ को कंट्रोल करते हैं।

इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन में ये बात सामने आई  है कि कच्चे अमरूद के छिलके में एंटी-डायबिटीक तत्व होते हैं। ये अध्ययन बताता है कि कच्चे अमरूद को छिलके समेत खाने से सीरम ट्राईग्लाईसेराइड लेवल कम होने में मदद मिलती है। इसके अलावा, डायबिटीज़ से जुड़ी कॉमन लिपिड एबनॉर्मिलिटी जैसे कि हाइपर- ट्राईग्लाईसेराइडेमिया (hypertriglyceridaemia) और हाइपर-कॉलेस्ट्रॉलेमिया (hypercholesterolemia) कम होती है।

हाइपर- ट्राईग्लाईसेराइडेमिया के कारण आमतौर पर इंसुलिन रेज़िस्टेंस, हाइपरइंसुलेनेमिया और ग्लूकोज़ टोलेरेंस जैसी समस्याएं हो जाती हैं। इसलिए कच्चे अमरूद का छिलका टाइप-2 डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए बहुत अच्छा हो सकता है।

अमरूद के छिलके कॉलेस्ट्रॉल लेवल, एलडीएल (low-density lipoprotein), एचएलडी (cholesterol and increase high-density lipoprotein) भी कम करते हैं जिससे कि डायबिटीज़ के मरीज़ों का दिल की बीमारियों का जोखिम घटता है।


अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि इन छिलको में हेपेटो-प्रोटेक्टिव तत्व होते हैं। इनसे अल्कालाइन फोस्फेटेस (Alkaline Phosphatase) कम होता है जिससे कि लीवर की क्षमता बढ़ती है। इसलिए अमरूद को छिलकों के साथ खाएं। उसके ऊपर के केमिकल और वेक्स से बचने के लिए उसे अच्छी तरह से धोना न भूलें।

Thursday, 4 August 2016

काली मिर्च, तुलसी और अदरक से होते है ये हेरान कर देने वाले फ़ायदे!

healthpatrika.com     16:03:00    
इस मानसून के मोसम में इंफेक्शन, एलर्जी, कोल्ड होना आम बात है। इंफेक्शन से शरीर में काफी कमजोरी आ जाती है। कई बार तो ऐसी हालत हो जाती है कि खाना पचाना मुश्किल होता है और इम्‍यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है।
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तो आइये जानते हैं कैसे आप मानूसन सीजन में इम्यून सिस्टम बढ़ा सकते हैं :-

आपको बता दे कि इम्यून सिस्टम मजबूत करने के लिए सबसे पहले तो आपको हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना चाहिए। दूसरा अपनी नींद पूरी करें। नींद के साथ किसी तरह की लापरवाई ना करें। कम से कम 7 से 8 घंटे जरुर सोएं। तनाव से दूर रहें। तनाव का इम्यून सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

इम्यून बढ़ाने के लिए खाएं ये फूड :-

काली मिर्च :- पाउडर के तौर पर या क्रश करके किसी भी रूप में आप काली मिर्च का सेवन करें। इससे गैस्ट्रिक प्रॉब्लम्स नहीं होंगी। काली मिर्च से शरीर में पनपने वाले कई बैक्टीरिया खत्म किए जा सकते हैं। इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल तत्व बुखार और अन्य इंफेक्शंस से बचाते हैं। इसलिए काली मिर्च का सेवन फायदेमंद हो सकता है।

अदरक और लहसून :- सुपर एंटी इंफ्लेमेट्री तत्वों से भरपूर अदरक और लहसून शरीर में होने वाले दर्द और मितली से बचाते हैं। अंगुठे के आकार की अदरक, एक नींबू, 2-4 टुकड़े लहसून के और एक गाजर, इन सबका जूस बनाकर पीने से इम्यून सिस्टम बहुत मजबूत होता है।

तुलसी :- बुखार, अस्थमा या फेफड़ों की किसी भी तरह की बीमारी से तुलसी खाकर बचा जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि तुलसी की कुछ पत्तियों को पानी में डालकर पीने से पानी भी साफ हो जाता है।


हल्दी और शहद :- सीजनल एलर्जी से बचने के लिए हल्दी और शहद रामबाण हैं। ये बुखार, वायरल इंफेक्शन या फिर सीजनल एलर्जी के बैक्टीरिया को खत्म करता है। साथ ही इम्‍यून सिस्टम भी मजबूत करता है।

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