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Friday, 15 April 2016

रोज एक कटोरी दही खाने से होता है ये हेरान कर देने वाला फायदा

healthpatrika.com     22:05:00    
क्रैनबेरी निस्संदेह मूत्र मार्ग में संक्रमण (यूटीआई) के इलाज का सबसे प्रभावी और प्राकृतिक उपाय में से एक है। लेकिन ये आसानी से उपलब्ध नहीं होने वाला महंगा फल है। खैर, अब आप किफायती और आसानी से मिलने वाली चीज से इस समस्या से राहत पा सकते हैं। हम बात कर रहे हैं दही की। जी हां, रोजाना एक कटोरी दही खाने से आप काफी हद तक यूटीआई के लक्षणों से राहत पा सकते हैं। 

every day eat curd

जानें दही ही क्यों :-
दरअसल मूत्र जननांग क्षेत्र (urogenital region) में बैक्टीरिया के विकास होने पर मूत्र मार्ग में संक्रमण (यूटीआई) की समस्या होती है। इसलिए इस हिस्से से बैक्टीरिया को ख़त्म करना बहुत ज़रूरी होता है। दही एक नेचुरल प्रोबायोटिक है। इसके तत्व नेचुरल एंटीबायोटिक होते हैं। इसमें मौजूद लैक्टोबैसिलस और गुड बैक्टीरिया यूटीआई के लिए जिम्मेदार हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने में मदद करते हैं। इसके अलावा दही से हानिकारक जीवाणुओं को मारने और आंत्र वनस्पति (intestinal flora) को बनाए रखने में मदद मिलती है।

कितनी बार दही खाना चाहिए :-
अधिकतर विशेषज्ञों के अनुसार, यूटीआई से निपटने ने और इससे दूर रहने के लिए रोजाना एक कटोरी दही खानी चाहिए। अमेरिकन सोसायटी जर्नल फॉर क्लीनिकल न्यूट्रीशन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, एक हफ्ते में तीन बार से अधिक मिल्क प्रोडक्ट खाने से यूटीआई के लक्षणों से राहत मिलती है। इसके अलावा आप रोजाना कम से कम आठ गिलास पानी पियें। इससे शरीर से टोक्सिन बाहर निकलने और यूटीआई की पुनरावृत्ति को रोकने में मदद मिलती है।

Saturday, 5 March 2016

अगर आप ज्यादा नमक खाते हैं तो आपके लिए बड़े काम की है ये खबर...

healthpatrika.com     12:17:00    


अगर खाने में नमक ना हो तो खाना बेस्वाद लगता है। हालांकि ह्रदय रोगों में ज्यादा नमक का सेवन हानिकारक हो सकता है, लेकिन भोजन का स्वाद न बिगड़े इसलिए लोग अपने स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने से भी बाज नहीं आते हैं। अब वैज्ञानिकों का एक नया शोध ऐसे लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है।

you will be use salt in diet

फिलाडेल्फिया के मोनेल केमिकल सेंसेज के वैज्ञानिकों ने अपने नए शोध में जीभ पर मौजूद उन कोशिकाओं को ढूंढ निकाला है जो स्वाद महसूस करने का काम करती हैं। इस शोध की अहमियत ये है कि कोशिकाओं की कार्यप्रणाली को समझने के बाद नमक का कृत्रिम विकल्प तैयार करना संभव हो सकेगा।

कम मात्रा में भी पर्याप्त स्वाद : शोध से जुड़े ब्रायन लेवानडोस्की का कहना है कि स्वाद के पहचान से जुड़ी प्रक्रिया को समझने के बाद भोजन में नमक की मात्रा को कम करने की रणनीति बनाने में आसानी होगी। इसके बाद लोगों को नमक की कम मात्रा में भी पर्याप्त स्वाद मिल सकेगा।

नेगेटिव आयन रिसेप्टर की जानकारी : सोडियम के पॉजिटिव और क्लोरीन के नेगेटिव आयन मिलकर नमक का निर्माण करते हैं। नए शोध से नेगेटिव आयन रिसेप्टर की जानकारी मिली है। साथ ही उन कोशिकाओं के बारे में भी पता चला है जो कि नेगेटिव आयन को महसूस करती हैं।

माना जा रहा है कि खाने में सोडियम की मात्रा को नियंत्रित करने में यह शोध मील का पत्थर साबित होगा। गौरतलब है कि इससे पहले तक जीभ में पॉजिटिव आयन महसूस करने वाले रिसेप्टर की ही जानकारी थी।

Thursday, 25 February 2016

दिल को स्वस्थ रखना है तो जरुर पियें ब्लैक टी

healthpatrika.com     13:38:00    
ब्लैक टी वजन घटाने में मदद करती है, ये बात तो हम सभी जानते हैं, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि काली चाय दिल की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है। जी हां, एक नए रिसर्चसे यह बात सामने आई है कि काली चाय दिल को स्वस्थ रखने में बहुत मददगार होती है। आइये जानते है इसके बारे में...

black tea keep your heart healthy

दिल के लिए काली चाय : काली चाय दिल की सेहत के लिए बहुत अच्‍छी होती है। एक ताजा अध्धयन में यह बात सामने आई है कि काली चाय में पाए जाने वाले एक विशेष तत्‍व और उसकी उपयोगिता के बारे में बताया गया है। काली चाय में प्रचुरता से पाया जाने वाला एक प्रकार का फलेवनॉयड, क्व र्सटीन, धमनियों को ऑक्सीकरण से होने वाले नुकसान से बचाता है। साथ ही यह हृदयवाहिका से संबंधित बीमारियों की संभावना को भी कम करता है।

एंटीऑक्सीडेंट है फ्लेवनॉयड : फ्लेवनॉयड पौधों में पाए जाने वाले साधारण वर्णक यौगिक होता है। यह एंटीऑक्सीडेंट के तौर पर काम करता है। विटामिन-C के असर को बढ़ाता है और रक्तवाहिकाओं के आसपास संयोजी ऊतकों की रक्षा करता है।

अध्धयन से निकले निष्कर्ष : यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न आस्ट्रेलिया के स्कूल ऑफ मेडिसिन के रिसर्च फेलो नेतेली वार्ड और फार्मेकोलॉजी के प्रोफेसोरियल फेला, केविन क्रॉफ्ट ने चूहों पर किए गए एक प्रयोग के आधार पर कहा कि हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि क्व र्सटीन, वाहिकाओं को ऑक्सीडेंट से होने वाले नुकसान से बचाने में सक्षम है।

शोध पत्रिका बायोकेमिकल फॉर्मेकोलॉजी के मुताबिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस बात के प्रमाण हैं कि खाद्य फ्लेवनॉयड्स उच्च रक्तचाप को कम कर सकता है और अथेरोस्क्लेरोसिस के विकास को कम कर सकता है।


अध्धयन के नतीजे : विश्वविद्यालय के बयान के मुताबिक वार्ड और क्रॉफ्ट ने कहा, भविष्य में हृदय रक्तवाहिकाओं पर फ्लेवनॉयड के असर से सम्बंधित अध्ययनों में अलग-अलग तरह के फ्लेवनॉयड और फ्लेवनॉयड के खाद्य स्रोतों के उपयोग पर विचार किया जाना चाहिए।

Wednesday, 24 February 2016

अगर आप भी याददाश्त की समस्या से परेशान हैं तो अपनी डाइट में शामिल करें ये चीजें...

healthpatrika.com     14:37:00    
आपके साथ भी ऐसा होता होगा कि काम के दबाव के चलते आप अक्सर छोटी-छोटी बातें भूल जाते हैं। अगर आप भी याददाश्त की समस्या से परेशान हैं तो अपनी डाइट में कुछ ऐसी चीजों को शामिल करें, जो आपका दिमाग तेज करें। इन खाद्य पदार्थो को डाइट में शामिल करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। तो आइये जानते इनके बारे में..

eating these things for grow your memory

टमाटर : इसमें एंटीऑक्सीडेंट होता है। रोजाना सलाद के रूप में इसे खाने से याददाश्त अच्छी रहती है।

किशमिश : इसमें मौजूद विटामिन-C दिमाग को तरोताजा रखता है। रोजाना सुबह के समय 15-20 किशमिश भिगोकर खाने से खून की कमी दूर होती है और दिल मजबूत होता है।

कद्दू के बीज : इसमें जिंक तत्व होता है जो मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाकर याददाश्त मजबूत करता है।

जैतून का तेल : इसे खाना बनाने में प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा रोटी पर देशी घी के बजाय इसे लगाकर भी खाया जा सकता है। यह दिमाग को ताकत देता है।


इनसे परहेज करें : अधिक नमक, शक्कर, तले-भुने पदार्थ व फास्ट फूड दिमाग पर विपरीत असर डालते हैं। अतः इनका सेवन कम करना चाहिए।

रात को अच्छी नींद लेनी हो, तो सोने से पहले रोज पिये दूध....

healthpatrika.com     13:08:00    
कई लोगों में अक्सर यह समस्या पाई जाती है कि उन्हें रात में नींद नही आती है या फिर रात में बीच-बीच में आंखे खुल जाती है। इसके लिए वे रात को नीदं आने के लिए नींद की दवाई आदि लेकर सोते है। लेकिन आप बिना दवाई लिए भी पूरी नींद का आनंद ले सकते है। जी हां, एक अध्ययन से पता चला है कि यदि रात को सोते समय गाय का दूध पीकर सोये तो इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है।

for good sleep in night have drink milk

दक्षिण कोरिया के युमयांग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑर न्यूरोसाइंस के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि रात के समय पीए गए दूध में विशेषरूप से ट्रीप्टोफेन और मेलाटोनिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। मेलाटोनिन एक ऐसे हार्मोन्स होते है, जो कि सोने और उठने के चक्र को नियंत्रित करते हैं। ट्रिप्टोफेन सेरोटोनिन और मेलाटोनिन में बदल जाता है।

चूहों पर किया रिसर्च : चूहों पर किये गये रिसर्च के दौरान  कुछ चूहों को दिन में दूध, कुछ चूहों को रात में दूध तथा पानी और डायजेपाम दिया गया और फिर उन्हें 20 मिनट के लिए घूमने वाले सिलेंडर पर रख दिया गया। अध्ययन में यह पाया गया कि नींद से भरे चूहे को सिलेंडर पर रूकने में काफी परेशानी हुई। दिन में दूध पीने वाले चूहों के मुकाबले रात में दूध पीने वाले चूहे एक घंटे बाद कम एक्टिव दिखाई दिए।


शोधकर्ताओं ने बताया कि लंबे समय से दूध को सोने के लिए उपयोग मे लाया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि “दूध को बढ़ावा देने वाले प्रभावों के लिए मनोवैज्ञानिक संघ को जिम्मेदार ठहराया है और इसमें नींद को बढ़ावा देने वाले घटक की मात्रा काफी होती है”। अध्ययन ने बताया कि निष्कर्ष सलाह देते हैं कि रात के समय दूध पीने से नींद संबंधित परेशानियां खत्म हो जाती हैं और चिंता-विकार जैसे समस्याओं के उपचार के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। यह अध्ययन जरनल ऑफ मेडिसिनल फूड में प्रकाशित हुई थी।

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