Tuesday, 16 August 2016

जानिए हमारे शरीर के लिए कितना फायदेमंद होता है उपवास!

healthpatrika.com     21:49:00    

एक बार भोजन कर लेने के बाद आपको कम से कम आठ घंटे बाद ही दूसरा भोजन करना चाहिए। इस नियम का पालन आप तब भी कर सकते हैं, जब आप घर से बाहर हों। ये तो बात हुई योग के नियम की, लेकिन फिर भी सामान्य स्थिति में भी किसी इंसान को दो भोजनों के बीच कम से कम 5 घंटे का अंतर तो रखना ही चाहिए। ऐसा क्यों कहा जा रहा है? इसलिए क्योंकि खाली पेट ही हमारा मल उत्सर्जन तंत्र अच्छे तरीके से काम कर पाता है।


आइये इसे एक प्रयोग से समझने की कोशिश करते हैं। मान लीजिए कि आप एक खास मात्रा में भोजन करते हैं। खाने की इस मात्रा को दो हिस्सों में बांट लें और दिन में दो बार इसे खाएं। दूसरी तरफ एक दूसरा आदमी है, जो खाने की इसी मात्रा को 10 हिस्सों में बांट लेता है और दिन में दस बार इसे खाता है। आप देखेंगे कि जो शख्स इसे दस बार खा रहा है, वह मोटा होता जाएगा। जरा सोचकर देखें, दस बार खाने वाले ने भी तो उतना ही खाया, जितनी दो बार खाने वाले ने। फिर ऐसा क्यों हुआ कि दस बार खाने वाले पर मोटापा चढ़ गया और दो बार खाने वाला ठीक ठाक रहा।

आइये जानते है उपवास के फायदे :-

ऐेसा क्यों हुआ? ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि दस बार खाने वाले का मल उत्सर्जन तंत्र ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है। ऐसे मामलों में तमाम कचरा जिसे शरीर से बाहर निकल जाना चाहिए था, वह बाहर निकल नहीं पाता, क्योंकि पेट किसी वक्त खाली ही नहीं रहता। वह तो लगातार भरा हुआ है। जब पेट में खाना है और पाचन तंत्र काम कर रहा है तो मल उर्त्सजन तंत्र प्रभावी तरीके से काम नहीं कर पाता। सफाई तभी अच्छी तरह से होती है, जब पेट खाली होता है।

आपने कभी गौर किया है कि जब आप बहुत बीमार पड़ते हैं, बेहद कमजोर हो जाते हैं और फिर जब आप बिस्तर से उठने की कोशिश करते हैं तो आप कैसे चलते हैं?

एक एक कदम फूंक-फूंककर रखते हैं। जब आपका शरीर हल्‍का हो जाता है तो आपके भीतर तमाम दूसरी चीजों के प्रति सजगता अपने आप ही बढ़ती जाती है। मान लें आप बहुत ज्यादा भूखे हैं और खाना आपके सामने रख दिया जाए, तो क्या होता है? आप दोनों हाथों से टूट पड़ते हैं उस खाने पर। दरअसल, जब आप बहुत ज्यादा भूखे होते हैं तो आपका पूरा शरीर बस एक ही चीज चाहता है, उस खाने को जल्दी से जल्दी खा लेना चाहता है, लेकिन तब आप एक पल के लिए रुकें। खाना शुरू करने से पहले हर उस शख्स और चीज के प्रति आभार व्यक्त करें, जिसकी बदौलत यह खाना आप तक पहुंचा है। 

आपको बता दे कि मसलन वह खेत, वह किसान, वह व्यक्ति जिसने खाना बनाया और वह भी जिसने इसे आपको परोसा। इसके अलावा, उस खाने को भी धन्यवाद देना चाहिए, क्योंकि यह आपको जीवन दे रहा है। देखने में भले ही यह छोटी सी बात लग रही है लेकिन यह आप पर आपके शरीर की पकड़ को ढीला कर देती है। इससे यह अहसास होता है कि आप महज एक शरीर नहीं हैं। जब आप बहुत भूखे होते हैं तो आप महज एक शरीर होते हैं। अपने अंदर थोड़ा सा जगह बनाएं अब आपको लगेगा कि आप अब उतने भूखे नहीं हैं। भूख जहां की तहां है, आप भी वहीं हैं, पर फिर भी लगेगा मानो सब ठीक ठाक है। इसी बात को अगर आपने समझने में देर कर दी तो यकीन मानिए आपका उपवास कष्टकारी हो जाएगा।

उपवास का महत्व :-

यहां एक बात और बहुत महत्वपूर्ण है कि किसी भी हाल में जबर्दस्ती न किया जाए। अगर आप शरीर के प्राकृतिक चक्र पर गौर करेंगे तो आपको पता चलेगा कि मंडल नाम की एक चीज होती है। मंडल का मतलब है कि हर 40 से 48 दिनों में शरीर एक खास चक्र से गुजरता है।

हर चक्र में तीन दिन ऐसे होते हैं जिनमें आपके शरीर को भोजन की आवश्यकता नहीं होती। अगर आप अपने शरीर को लेकर सजग हो जाएंगे तो आपको खुद भी इस बात का अहसास हो जाएगा कि इन दिनों में शरीर को भोजन की जरूरत नहीं होती। इनमें से किसी भी एक दिन आप बिना भोजन के आराम से रह सकते हैं।

11 से 14 दिनों में एक दिन ऐसा भी आता है, जब आपका कुछ भी खाने का मन नहीं करेगा। उस दिन आपको नहीं खाना चाहिए। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि कुत्ते और बिल्लियों के अंदर भी इतनी सजगता होती है। कभी गौर से देखें, किसी खास दिन वे कुछ भी नहीं खाते। दरअसल, अपने सिस्टम के प्रति वे पूरी तरह सजग होते हैं। जिस दिन सिस्टम कहता है कि आज खाना नहीं चाहिए, वह दिन उनके लिए शरीर की सफाई का दिन बन जाता है और उस दिन वे कुछ भी नहीं खाते। 

अब आपके भीतर तो इतनी जागरूकता नहीं कि आप उन खास दिनों को पहचान सकें। फिर क्या किया जाए! बस इस समस्या के समाधान के लिए अपने यहां एकादशी का दिन तय कर दिया गया। हिंदी महीनों के हिसाब से देखें तो हर 14 दिनों में एक बार एकादशी आती है। इसका यह है कि हर 14 दिनों में आप एक दिन बिना खाए रह सकते हैं। 

अगर आप बिना कुछ खाए रह ही नहीं सकते या आपका कामकाज ऐसा है, जिसके चलते भूखा रहना तुम्हारे वश में नहीं और भूखे रहने के लिए जिस साधना की जरूरत होती है, वह भी आपके पास नहीं है, तो आप फलाहार ले सकते हैं। कुल मिलाकर बात इतनी है कि बस अपने सिस्टम के प्रति जागरूक हो जाएं और यह देखने की कोशिश करें कि कुछ दिन ऐसे हैं, जिनमें आपको खाने की आवश्यकता महसूस नहीं होती। इन दिनों जबर्दस्ती खाना अच्छी बात नहीं है।

उपवास करने के नियम :-

कैसे करें उपवास? मान लो कोई एक निश्‍चित समय के लिए उपवास करना चाहता है। इस उपवास के साथ उसे साधना या इसी तरह की कोई और आध्यात्मिक क्रिया करनी चाहिए। बिना अपने शरीर और दिमाग को तैयार किए अगर आप जबर्दस्ती उपवास करने की कोशिश करेंगे तो इससे आपके सेहत को नुकसान होगा। लेकिन आपका शरीर और दिमाग अगर पूरी तरह तैयार है और ऊर्जा के मामले में भी आपको कोई समस्या नहीं है तो बेशक उपवास रखना आपके लिए बहुत लाभकारी होगा। 

एक बात और, अगर आप बार-बार चाय और कॉफी पीने के आदी हैं और उपवास रखने की कोशिश करते हैं तो आपको बहुत ज्यादा दिक्कत होगी। इस समस्या का तो एक ही हल है। अगर आप उपवास रखना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने खानपान की आदतों को सुधारें। पहले सही तरह का खाना खाने की आदत डालें, तब उपवास की सोचो। अगर खाने की अपनी इच्छा को आप जबर्दस्ती रोकने की कोशिश करेंगे तो यह आपके शरीर को हानि पहुंचायेगा।

हो सकता है, आपमें से कुछ लोग ऐसे भी हों, जो इस मामले में भी अपना कमाल दिखाना चाहते हों। हो सकता है, ऐसे लोग तीन दिन का उपवास रख लें और फिर दुनिया को बताते फिरें कि देखो, हमने कितना वीरता का काम किया है। ऐसा भूलकर भी मत करें। याद रखें, इससे आपको हानि ही होगी, लाभ नहीं हो सकता। होगा यह कि आप खुद को कमजोर बना लेंगे। ऐसा कुछ भी करने से बेहतर यह है कि आप अपने अंदर इस बात की गहरी समझ पैदा करें कि शरीर कैसे काम करता है और आपके लिए सबसे अच्छा क्या है।

ऐसा नहीं है कि उपवास करना हर किसी के लिए फायदेमंद है, लेकिन हां, पूरी समझ के साथ इसे किया जाए तो इसके अनगिनत फायदे हो सकते हैं। तो बस अपने शरीर की उस खास स्थिति को पहचानें और उस दौरान खाना छोड़ दें। यही उपवास करने का सबसे अच्छा तरीका है।

0 comments :

© 2011-2014 Health Patrika. Designed by Bloggertheme9. Powered by Blogger.